आलोक तोमर को लोग जानते भी हैं और नहीं भी जानते. उनके वारे में वहुत सारे किस्से कहे जाते हैं, ज्यादातर सच और मामूली और कुछ कल्पित और खतरनाक. दो बार तिहाड़ जेल और कई बार विदेश हो आए आलोक तोमर ने भारत में काश्मीर से ले कर कालाहांडी के सच बता कर लोगों को स्तब्ध भी किया है तो दिल्ली के एक पुलिस अफसर से पंजा भिडा कर जेल भी गए हैं. वे दाऊद इब्राहीम से भी मिले हैं और रजनीश से भी. वे टी वी, अखबार, और इंटरनेट की पत्रकारिता करते हैं.

Sunday, June 1, 2008

अभिषेक वर्मा ब्लैकमेल पर उतरा


डेटलाइन इंडिया
नई दिल्ली, 1 जून- नेवी वॉर रूम मामले में जमानत पर छूटे अभिषेक वर्मा ने कल पूरी रात अपने खास दोस्तों के साथ दक्षिण दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में पार्टी की। भुगतान उन्होंने अपने क्रेडिट कार्ड से किया। लगभग दो लाख रुपए का यह भुगतान होटल को तो मिल गया मगर सवाल अब भी बाकी बचा है कि लगभग चार साल तिहाड़ जेल में रहने के बाद भी उनका कार्ड चालू कैसे था और इसका इस्तेमाल और भुगतान कौन कर रहा था।

अभिषेक के अपने सारे ज्ञात बैंक खाते तो सील हैं। इसी पार्टी में अभिषेक ने जो बड़े बड़े बयान दिए वे बहुत गंभीर हैं। इन बयानों से जाहिर है कि वे कांग्रेस के बड़े नेताओं और यहां तक कि कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी तक को ब्लैकमेल करना चाहते हैं। ब्लैकमेल का उपकरण र्स्कोपियन पनडुब्बी सौदे में दलाली का मामला है और अभिषेक वर्मा इतना भी बोल पा रहा है तो इसकी वजह यह है कि केन्द्रीय जांच ब्यूरो - सीबीआई ने आपस में जुड़े नेवी वॉर रूम लीक और इस सौदे की दलाली के मामले में अदालत के बार बार कहने और समय सीमा तय करने बावजूद अब तक अपनी अंतिम रपट नही दी है। सीबीआई के अधिकारी इस संबंध में यह भी नही बता पाए हैं कि नेवी वॉर रूम लीक और पनडुब्बी सौदे में आपस में सीधे क्या संबंध है। सीबीआई ने इस मामलें में अब तक कई जांच अधिकारी बदले हैं, अदालत में सरकारी वकील बार बार बदले गए हैं और जो सीबीआई अभी दो महीने पहले तक यह कह रही थी कि अभिषेक वर्मा को जिंदगी भर जेल में रखने के लिए उसके पास पर्याप्त प्रमाण हैं, उसी ने अब अदालत को कहा है कि उसके पास सूचनाएं तो हैं लेकिन इनके बारे में प्रमाण मिलना बाकी है।

अभिषेक वर्मा की हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी कि उसने सीधे श्रीमती सोनिया गांधी से मिलने के लिए भी समय मांगा है। यह समय उसे मिलेगा या नही इस बारे में कांग्रेस नेता एकदम खामोश हैं और अभिषेक वर्मा की माँ रीता वर्मा असली धर्म संकट में हैं क्योंकि वे अब भी कांग्रेस की सदस्य हैं और भूतपूर्व सांसद होने के नाते अब भी संगठन की कई समितियों में हैं। अभिषेक वर्मा ने आज असली मुसीबत में कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोती लाल वोरा को डाला। अभिषेक उनके बंगले पर पहुंचे और अंकल कह कर बाकायदा उनके पांव छुए।

श्री वोरा को और कुछ नही सूझा तो उन्होंने एक फोन करने के बहाने बंगले के भीतर जाने में ही खैरियत समझी। हालांकि उनका सचिव मोबाइल और कॉर्डलैस फोन ले कर साथ में ही खड़ा हुआ था। अभिषेक भाजपा के नेताओं से भी मिलना चाहते हैं और उन्होंने एक साझा मित्र के जरिए भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी से भी समय मांगा है। जाहिर है कि जेल से निकले अभिषेक वर्मा अपनी इस आजादी को अपनी अदालती मुक्ति के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। लेकिन श्रीमती सोनिया गांधी और दूसरे कांग्रेसी नेताओं को ब्लैकमेल कर के वे कुछ कर पाएंगे इसकी संभावना बहुत कम दिखती है। उन्होंने तीस लाख रुपए जमानत के तौर पर कहां से जमा करवाए इसकी भी जांच की जा रही है।

2 comments:

shashisinghal said...

आलोक जी ,
नमस्कार
हाल ही मे जमानत पर छूटे अभिशेक वर्मा के बारे मे आपकी रपट ,विचार व आप्की शन्का पडी । तोमर जी आज का सच तो यही है कि दमखम रखने वाले व ऊन्ची पहुन्च वाले लोग कानून को अपनी जेब मे रख कर घूमते है जिसे जब चाहे जैसे अपने हिसाब से चलाते है । वरना यह सोचनीय बात है कि चार साल से जेल मे बन्द होने के बाद भी उसके पास जमानत के लिए इतना पैसा कहा से आया ? यह बात कानून के रखवालो के दिमाग मे नही आई ? आम चुनाव सर पर है ऎसे मे अभिशेक मौके का लाभ लेते हुऎ कन्ग्रेस या भाजपा मे घुसने की कोशिश कर रहा है और इसी कोशिश के तहत् वह सोनिया व आड्वाणी जी से मिलने के प्रयास कर रहा है । हालान्कि जमानत के तीस लाख रुपए उसके पास कहा से आए इसकी जान्च हो रही है किन्तु इस जान्च - वान्च से कुछ होने वाला नही है ।नतीजतन सुनने मे यही आएगा कि अभिशेक अमुक पार्टी से चुनाव लड. रहे है ।
शशि सिन्घल
www.meraashiyana.blogspot.com

Anonymous said...

Dear Mr. Tomar,

I am shocked to read LIES on your website. You have mentioned that I had a lavish dinner when I was released from Tihar on 1st June 2008 and I spent 2 lacs on my credit card. Furthermore you have alleged that I had sought appointments with various political leaders.

For your information I was released on the 3rd June 2008 at 9.45pm from Tihar and this can be evidenced by the Tihar Jail leaving certificate for undertrials which you are free to inspect at my lawyer's office in Delhi.

Why should you write lies and defame anyone? Is this journalism?

I hope you realize one day before it is too late and someone like me who you rub the wrong way takes you to court and files for criminal defamation u/s 499, and 500 IPC.

Should you feel like apologizing, free free to call me on +91.98114.32277 or write me on a.verma@mail.com

Thanks,
Abhishek Verma