आलोक तोमर को लोग जानते भी हैं और नहीं भी जानते. उनके वारे में वहुत सारे किस्से कहे जाते हैं, ज्यादातर सच और मामूली और कुछ कल्पित और खतरनाक. दो बार तिहाड़ जेल और कई बार विदेश हो आए आलोक तोमर ने भारत में काश्मीर से ले कर कालाहांडी के सच बता कर लोगों को स्तब्ध भी किया है तो दिल्ली के एक पुलिस अफसर से पंजा भिडा कर जेल भी गए हैं. वे दाऊद इब्राहीम से भी मिले हैं और रजनीश से भी. वे टी वी, अखबार, और इंटरनेट की पत्रकारिता करते हैं.

Wednesday, April 2, 2008

आजाद टिकैत और बंधक राजनीति






आलोक तोमर
नई दिल्ली, 2 अप्रैल-जिन महेंद्र सिंह टिकैत ने मायावती की पुलिस और पीएसी को पूरे 72 घंटे इंतजार करवाया और फिर अधिकारी गिड़गिड़ाए तो अपनी गाड़ी में बैठकर वे बिजनौर अदालत गए और वहां से भी जमानत पा कर आजाद हो गए, मायावती के अनुसार वे मामूली आदमी हैं और कांग्रेस टिकैत को उनके खिलाफ इस्तेमाल कर रही है। महेंद्र सिंह टिकैत अदालत से आजादी पाते ही धरने पर बैठ गए हैं और उनका यह धरना कब आंदोलन का रूप ले लेगा यह नहीं कहा जा सकता।
मायावती ने आज अपने खास आग उगलने वाले अंदाज में कहा कि टिकैत एक मामूली आदमी है और उसकी मुझे गाली देने की हिम्मत इसलिए हुई कि मेरे पहले की सरकारों ने अनुसूचित जाति और जनजाति अधिनियम का कभी ठीक से पालन नहीं किया। मायावती लखनऊ में टिकैत के बारे में बात करते वक्त तू-तड़ाक की भाषा इस्तेमाल कर रही थीं। इसके पहले टिकैत उन्हें अपनी बेटी की तरह बता चुके हैं और इस बात खेद जाहिर कर चुके हैं कि जुबान फिसल जाने की वजह से उनके मुंह से मायावती के लिए चमार शब्द निकल गया।
बिजनौर में हुई एक किसान रैली में टिकैत ने जब यह भाषण दिया था तो किसी का ध्यान भी इस ओर नहीं गया था। उन्होने फंसवाया उनसे जलने वाले दूसरे जाट नेता चौधरी अजीत सिंह ने जिन्होने टिकैत को मंच पर ही टोका और फिर अनजान खड़े अधिकारियों से मुखातिब हो कर कहा कि बुजुर्ग नेता से गलती हो गई है। तब जाकर अधिकारियों ने लखनऊ खबर की और वहां से फौरन उन्हें निर्देष मिला कि आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। इसके बाद जैसा कि आप जानते हैं, टिकैत, उनके चार बेटों और 14 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया।
पूरी उत्तर प्रदेश सरकार की ताकत को चुनौती देने वाले महेंद्र सिंह टिकैत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाटों में मसीहा का दर्जा रखते हैं और पहले से मायावती पर निशाना साध कर बैठी यूपीए सरकार ने इस मौके को जाट वोट बैंक हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया। केंद्रीय गृहराज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल और एक जमाने के गृह मंत्री और अब अनुसूचित जाति आयोग के अघ्यक्ष बूटा सिंह टिकैत के पक्ष में बयान देकर मायावती के निशाने पर आ गए। मायावती ने इन दोनों से इस्तीफा मांगा है और कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि वह टिकैत का राजनीतिक इस्तोमल कर रही है।
जहां तक महेंद्र सिंह टिकैत की बात है, वे आजाद होते ही एक और जाट पंचायत लगाने पहुंच गए और इससे जाहिर हुआ कि यह झगड़ा इतनी जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। टिकैत ने ऐलान कर दिया है कि वे अब अपनी लड़ाई दिल्ली आ कर लड़ेंगे और मायावती के समर्थकों को भी बतायेंगे कि वे अपनी राजनीति के लिए कैसे उनका इस्तेमाल कर रहीं हैं। अजीत सिंह को महेंद्र सिंह टिकैत ने अब तक मुलाकात का वक्त ही नहीं दिया है और मौका ताड़ कर समाजवादी पार्टी भी अब टिकैत के पक्ष में खड़ी हो गई है।

1 comment:

भुवनेश शर्मा said...

आलोकजी धन्‍यवाद इस जानकारी के लिए....यही बात मेरे दिमाग में घूम रही थी कि ऐसी रैली में कोई न कोई होगा जो टिकैत से जलता होगा और जरूर ये उसी के दिमाग की उपज है. पर आस्‍तीन के सांप अजीत सिंह को इससे कुछ हासिल होने वाला नहीं है.