आलोक तोमर को लोग जानते भी हैं और नहीं भी जानते. उनके वारे में वहुत सारे किस्से कहे जाते हैं, ज्यादातर सच और मामूली और कुछ कल्पित और खतरनाक. दो बार तिहाड़ जेल और कई बार विदेश हो आए आलोक तोमर ने भारत में काश्मीर से ले कर कालाहांडी के सच बता कर लोगों को स्तब्ध भी किया है तो दिल्ली के एक पुलिस अफसर से पंजा भिडा कर जेल भी गए हैं. वे दाऊद इब्राहीम से भी मिले हैं और रजनीश से भी. वे टी वी, अखबार, और इंटरनेट की पत्रकारिता करते हैं.

Sunday, April 13, 2008

बिरंची दास की मौत का खतरनाक रहस्य


डेटलाइन इंडिया
भुवनेश्वर, 13 अप्रैल - उड़ीसा के एथलेटिक चैम्पियन रहे बिरंची दास को भरी दोपहर राज्य की राजधानी में उनके घर के पास गोली से क्यों उड़ा दिया गया? बिरंची दास की ज्यादा ख्याति चार वर्ष- अब छह के हो चुके नन्हें बुधिया के गुरू के तौर पर है जिसका नाम सबसे कम उम्र में मैराथन दौड़ने के लिए गिनीज बुक में जा चुका है।
बिरंची दास का नाम किसी रिकार्ड पुस्तक में नहीं पहुंचा लेकिन एक एनजीओ द्वारा एक नन्हें बच्चे पर जुल्म ढाने के आरोप में वे जेल जरूर भेज दिए गए थे और वे इन दिनों जमानत पर थे। बुधिया ने हालांकि अदालत में बयान दिया था कि वह बिरंची दास को ही अपना पिता मानता है और उसके साथ कभी कोई जोर जबरदस्ती नहीं की गर्इ्र लेकिन इस बयान को अदालत ने मान्यता नहीं दी। अभियोजन पक्ष का कहना था कि इतने छोटे बच्चे के बयान का कोई मतलब नहीं होता है यह बात अलग है कि दो साल के बच्चे के बयान के आधार पर एक मामले में उम्र कैद भी दी जा चुकी है।
बिरंची दास का नाम बहुत हो चुका था और विदेशों से बुधिया की मदद के लिए उनके पास पैसा भी बहुत आ रहा था यही उनकी मौत का कारण बन गया। कमाल यह है कि बिरंची दास को जेल भेजने वाली राज्य सरकार जिसने मांगने पर भी उन्हें सुरक्षा नहीं दी थी और कई समारोहों में उन्हें सम्मानित कर चुकी थी और ये सम्मान खुद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर के हाथों दिए गए थे।
बिरंची दास की हत्या के बाद बुधिया कैरियर तबाह हो गया है। हाल ही में बिरंची दास को बुधिया के साथ अमेरिका आकर मैराथन में हिस्सा लेने का न्यौता मिला था और वीजा के कागज आ चुके थे। सिर्फ तीन महीने पहले दिल्ली में आए बिरंची दास ने आशंका जताई थी कि उन्हें जान से मार दिया जाएगा और पुलिस इसका जिम्मा प्रेम संबंधों के कारण हुए विवादों पर डालेगी। भुवनेश्वर पुलिस का पहला बयान भी यही है।
अरूण जेटली ने शरद से पूछा, तुम कौन?
डेटलाइन इंडिया
नई दिल्ली, 13 अप्रैल -भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड में राजनैतिक स्वार्थो को साधने के लिए आंख की शर्म का पर्दा भी आज गिर गया। भाजपा में कर्नाटक के प्रभारी अरूण जेटली आज सीधे सवाल कर दिया कि जबलपुर में पैदा हुए और बिहार से चुनाव जितने वाले शरद यादव कर्नाटक की राजनीति के मामलों में सवाल करने वाले कौन होते हैं।
शरद यादव ने कल भाजपा पर आरोप लगाया था कि बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा एनडीए के अन्य घटकों और खासतौर पर जनता दल यूनाइटेड की उपेक्षा कर रही है और कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अपनी दादागीरी चला रही है। श्री यादव ने कहा था कि इस स्थिति में उनकी पार्टी एनडीए में शामिल रहने पर विचार कर सकती है। श्री यादव को जब यह याद दिलाया गया था कि एनडीए के संयोजक उन्हीं की पार्टी के नेता जार्ज फर्नांडीज हैं तो उन्होंने पलट कर कहा था कि जार्ज अब एनडीए के नेता है, हमारे नहीं।
कर्नाटक विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए काफी संकट भरी घटना साबित होता जा रहा है। कर्नाटक के तुमकूर लोक सभा क्षेत्र से सांसद एस मल्लिकार्जुनैया ने अपने समर्थकों को टिकट नहीं मिलने के विरोध में संसद से इस्तीफा दे दिया है और अरूण जेटली ने जब उन्हें समझाने के लिए फोन किए तो वे लाइन पर भी नहीं आए। श्री जेटली के अनुसार यह पार्टी का अंदरूनी मामला है और जहां तक जनता दल यूनाइटेड का सवाल है तो वे कर्नाटक के पार्टी नेताओ से बातचीत करके रास्ता निकालेंगे। दूसरे शब्दों में जेटली ने कर्नाटक के मामले में शरद यादव को किसी भी किस्म का भाव देने से इनकार कर दिया है।
कर्नाटक भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दक्षिण भारत में कम समय के लिए ही सही भाजपा की पहली सरकार यहीं बनी। जनता दल सेकुलर ने भूतपूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के तानाशाह और अवसरवादी तौर तरीकों से उनकी पार्टी में भी बगावत हो चुकी है और इसका सीधा लाभ भाजपा को ही मिलने वाला है। देवगौड़ा अपने राज्य की विधानसभा चुनने के मामले में फिलहाल असाधरण रूप से खामोश हैं और इसी से जाहिर होता है कि वे अगली बार कोई चुनाव जीतने की उम्मीद गवां बैठे हैं।

1 comment:

अफ़लातून said...

" वारे में वहुत " नहीं ' बारे में बहुत "